उदास वक़्तों में भी, जुगनू लौ करते हैं
सितारे टिमटिमाते हैं
और कवि कविता लिखते हैं
उदास वक़्तों में भी
घास के तृण उगते हैं
पक्षी गाते और फूल खिलते हैं
उदास समय में भी
लोग सपने लेते हैं
दरिया बहते हैं और सूर्य उदय होता है
’ओ पंखुरी’ से
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1/15/2008
1/14/2008
शब्द रोशनी वाले : नवतेज भारती
जिस शब्द में से प्रकाश नही फूटता
उसको काग़ज़ पर मत रख
कोरा सफ़ेद काग़ज़
काले अक्षरों से ज़्यादा मोल का होता है.
’पंजाबी की श्रेष्ट प्रेम-कविताएं’ से
उसको काग़ज़ पर मत रख
कोरा सफ़ेद काग़ज़
काले अक्षरों से ज़्यादा मोल का होता है.
’पंजाबी की श्रेष्ट प्रेम-कविताएं’ से
जो चलते हैं : नवतेज भारती
यदि मैं चलता चलता रुक जाऊं
तब मेरे पांव ,उनको दे देना, जो चलते हैं
आंखे उनको, जो देखते हैं
दिल उनको, जो प्यार करते हैं.
’पंजाबी की श्रेष्ट प्रेम-कविताएं’ से
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